Quotes

Saturday, April 11, 2009

वो देखो दौड़ के मंज़िल पे जा पहुँचा,
कौन कहता है के,'झूठ के पाँव ' नही होते.


मैं चीख चीख के सब को बताता रह गया,
फिर ना कहना,'दीवारों के भी कान' होते हैं.


सारे हाक़िम लपक कर उसके पाँव छू आए,
तब मैं जान गया,'क़ानून के हाथ' लंबे हैं

1 comment:

  1. Dear Lalit,
    I am sure you will like this one too!

    http://sachmein.blogspot.com/2009/04/blog-post_18.html

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